हमारी माइक्रोबायोलॉजी लैब यह पता लगाती है कि संक्रमण किस जीवाणु से हुआ है और उस पर कौन-सी एंटीबायोटिक काम करेगी। हम खून, पेशाब, पस और बलगम की जाँच करते हैं, और खून में उन एंटीबॉडी की भी जाँच करते हैं जो शरीर संक्रमण के विरुद्ध बनाता है। कल्चर की रिपोर्ट आने में कुछ दिन लगते हैं, क्योंकि पहचान से पहले जीवाणु को उगना पड़ता है।
हमारे कंसल्टेंट माइक्रोबायोलॉजिस्ट हमारी 24 घंटे चलने वाली लैब में काम करते हैं, जहाँ बायोकेमिस्ट्री, हेमेटोलॉजी, क्लिनिकल पैथोलॉजी, सीरोलॉजी और साइटोपैथोलॉजी की जाँचें भी होती हैं। यही टीम हमारे वार्डों में संक्रमण नियंत्रण पर नज़र रखती है: कौन-से जीवाणु फैल रहे हैं और कौन-सी एंटीबायोटिक उन पर असर खो रही हैं।
सेवाएँ और प्रक्रियाएँ
- कल्चर: खून, पेशाब, पस या बलगम के सैंपल को तब तक उगाया जाता है जब तक जीवाणु की पहचान न हो जाए
- एंटीबायोटिक सेंसिटिविटी: पहचाने गए जीवाणु को कई एंटीबायोटिक के सामने जाँचा जाता है, ताकि पता चले कौन-सी काम करती है
- सीरोलॉजी: खून में संक्रमण के विरुद्ध बनी एंटीबॉडी की जाँच, जिससे बिहार में आम कई बुखारों की पुष्टि होती है
- संक्रमण नियंत्रण: हमारे वार्डों में कौन-से जीवाणु फैल रहे हैं और कौन-सी एंटीबायोटिक अब भी काम करती हैं, इस पर नज़र
- सैंपल संग्रह, रिपोर्ट जाँच लिखने वाले कंसल्टेंट के पास